भाई दूज क्यों मनाते हैं – क्या है भाई दूज की कहानी – 3 Powerful Bhai Dooj Story in Hindi

भाई दूज क्यों मनाते हैं – क्या है भाई दूज की कहानी – 3 Powerful Bhai Dooj Story in Hindi

भाई दूज क्यों मनाते हैं – क्या है भाई दूज की कहानी

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    भारत में कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। हर एक त्योहार हमें कुछ ना कुछ सिखा कर जाता है। चाहे वो दीपावली हो या होली, हर त्योहार का अपना एक महत्त्व है। हर रिश्ते की डोर को बेहतर बनाने के लिए एक त्योहार तो जरूर आता है। ठीक इसी तरह भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए हम भाई दूज मनाते हैं।

    भाई दूज हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। भ्रातृ द्वितीया या यम द्वितीया के नाम से भी जाने वाला यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है।

    भाई दूज को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भाई दूज क्यों मनाते हैं तथा भाई दूज की कहानी क्या है। साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि भाई दूज कब है और भाई दूज कैसे मनाते हैं।

    भाई दूज के त्योहार का भारत में काफी महत्त्व है। यह त्योहार हमें संदेश देता है कि अपने स्वजनों से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है। हमारी रोजमर्रा की व्यस्त ज़िंदगी से हमें थोड़ा वक्त अपने स्वजनों के लिए भी निकालना चाहिए।

    और भाई दूज का त्योहार हमें अपनों के उस प्रेम से अवगत कराता है। भाई दूज के त्योहार पर बहन अपने भाई के सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है और भाई अपनी बहन को उपहार देता है।

    यह पर्व भी बाकी त्योहारों की तरह हमारी परंपराओं से जुड़ा है। कई जगहों पर भाई दूज को भाई टीका भी कहा जाता है। भाई दूज को भारत के विभिन्न प्रदेशों में मनाया जाता है और लोग इसे अलग-अलग नामों से जानते हैं। इसे पश्चिम बंगाल में भाई फोंटा और महाराष्ट्र में भाऊ-बीज कहा जाता है।

    भाई दूज क्यों मनाते हैं ? सबसे लोकप्रिय कथा

    भाई और बहन के अनोखे रिश्ते के लिए भारत में दो त्योहार मनाए जाते हैं – रक्षाबंधन और भाई दूज। भाई बहन एक दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त, रक्षक और प्रशंसक होते हैं। इसी भावना और प्यार को बरकरार रखने के लिए हम भाई दूज मानते हैं।

    इसके साथ भाई दूज के मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा भी है। इस आर्टिकल में हम आपको ‘भाई दूज क्यों मनाते हैं ?’ के पीछे की यह पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं। भाई दूज मनाने के पीछे यमराज और यमुना की कहानी है।

    भाई दूज की कहानी – भाई दूज क्यों मनाते हैं ? यमराज और यमुना भाई-बहन थे और साथ ही इन दोनों में काफी प्रेम था। यमराज और यमुना सूर्य देव एवम् छाया की संतानें थीं। ऐसा कहा जाता है कि यमराज अपने कार्य की अधिकता के कारण यमुना से मिलने नहीं जा पाते थे।

    लेकिन यमुना उन्हें बहुत बुलाती रहतीं थीं। एक दिन किसी नदी तट पर यमराज की मुलाकात यमुना से हो गई। इससे यमुना काफी प्रसन्न हुई और उन्होंने अपने भाई का काफी स्वागत किया।

    यमुना ने अपने भाई यमराज से कहा कि आज से प्रत्येक वर्ष आप मुझसे मिलने इसी दिन आओगे। और तब से कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया का वो दिन भाई दूज के नाम से जाना जाता है।

    ऐसा भी कहा जाता है कि यदि भाई दूज के दिन कोई भाई यमुना नदी में स्नान करे तो उसके सारे संकट खत्म हो जाते हैं।

    तो ये थी ‘भाई दूज क्यों मनाते हैं’ के पीछे की पौराणिक कहानी। भाई दूज के दिन बहन अपने भाई को माथे पर तिलक लगा कर भोजन कराती है। ठीक उसी प्रकार जिस तरह यमुना ने यमराज को भोजन करवाया था। साथ ही भाई अपनी बहन के इस श्रृद्धा भाव को स्वीकार कर उसकी खुशियों की कामना करता है। इससे सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और यमराज का भी भय नहीं रहता।

    भाई दूज का त्योहार मना कर बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। इस दिन श्रद्धा भाव से बहन के यहां भोजन करने से भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।

    ऐसा भी माना जाता है कि यदि भाई बहन ने यह पर्व विधि विधान से मनाई हो तो भाई के साथ किसी प्रकार की घटना भी हो तो इस दिन यमराज उसके प्राण नहीं हरते। साथ ही भाई दूज मनाने से भाई एवम् बहन दोनों को धन, सम्पत्ति और सुख की प्राप्ति होती है।

    आइए पढ़ते हैं भाई दूज की कहानी और भाई दूज क्यूँ मनाते हैं।

    क्या है भाई दूज की कहानी – प्रथम कथा

    इस लेख में हम आपके साथ भाई दूज की कहानी/कथा भी शेयर कर रहे हैं। इस कहानी से आपको यह भी पता चलेगा कि हम भाई दूज क्यों मनाते हैं। भाई दूज की कहानी कुछ इस प्रकार है – एक बार एक बूढ़ी औरत की आठ संतानें होती हैं जिनमें सात बेटे और एक बेटी होती है।

    बूढ़ी औरत के बेटों पर सर्प की कुदृष्टि थी। इस वजह से उसके बेटे की शादी के सातवें फेरे होते ही सांप उसे डस लेता। इस तरह बूढ़ी औरत के छः बेटे मर गए और सातवें बेटे की उसने शादी नहीं की।

    साथ ही अपने भाई को अकेले देख उसकी बहन को काफी बुरा भी लगता। इस कृदृष्टि से बचने के लिए वह उपाय सोचने लगी और एक ज्योतिष के पास गई।

    ज्योतिष ने उसे कहा कि उसके भाई की जान तभी बच सकती है अगर वो उसकी बलाएं अपने सिर लेले। उसके बाद बहन अपने मायके अा गई। उसका भाई कुछ भी करता तो उससे पहले वो उस काम को करने लगती।

    कोई मना करता तो रोने लगती और जोर जोर से लड़ती। सभी उसकी बुराइयां करने लगे पर उसे किसी भी हाल में अपने भाई की रक्षा करनी थी।

    अब भाई की शादी का समय आ गया। भाई के सेहरा बांधने से पहले बहन चिल्लाने लगी कि मेरा भी मान करो और मुझे भी सेहरा पहनाओ। सबने उसे सेहरा दे दिया। सेहरे के अंदर एक सांप था जिसे बहन ने निकाल फेंका।

    जब घोड़े पर बैठने की बारी आई तो बहन बोलने लगी कि उसे पहले घोड़े पर बैठना है। सबने फिर उसकी बात मानी। घोड़े पर बैठते ही उसे वहां एक सांप दिखा जिसे उसने भगा दिया। बारात आगे निकली और जब दूल्हे का स्वागत किया गया तो ये फिर कहने लगी कि मेरा भी स्वागत करो।

    बहन के गले में माला डाली गई और उसमें भी एक सांप मिला। बहन ने उसे निकाल फेंका। जैसे ही शादी शुरू हुई तो सांपो का राजा खुद डसने आया। इस बार भी बहन ने उस सांप को पकड़ कर टोकरी में ढक दिया।

    फेरो के वक़्त नागिन बहन से अपने पति को छोड़ने की गुहार लगाने लगी। फिर बहन ने कहा कि उसके भाई से जब कुदृष्टि हटेगी तभी वो सांप को छोड़ेगी। नागिन ने कुदृष्टि हटा ली। इस तरह बहन ने अपने भाई के प्राणों की रक्षा की।

    वो भले ही दुनिया के नजर में कर्कश बन गई लेकिन उसने अपने भाई की जान बचा ली। तो ये थी ‘भाई दूज क्यों मनाते हैं’ की प्रथम कथा।

    अभी आपने भाई दूज की कहानी नम्बर १ पढ़ी।

    क्या है भाई दूज की कहानी – द्वितीय कथा

    भाई दूज के त्योहार के पीछे एक और कथा है। तो देखते हैं ‘भाई दूज क्यों मनाते हैं’ के पीछे यह कथा क्या कहती है। आप सभी जानते होंगे कि बहनें अपने भाइयों को वीर कहकर भी पुकारती है जिसका मतलब है बहादुर।

    पहले जब भी भाई किसी युद्ध में हिस्सा लेते तो उनकी बहनें उन्हें माथे पर तिलक लगाकर युद्ध में भेजती थी। साथ ही वे अपनी उम्र भाई को लग जाने का आशीर्वाद भी देती।

    भाइयों को भी बहन का रक्षक कहा जाता है। एक बार की बात है, एक बहन के सात भाई थे और उनमें से सबसे छोटा भाई अपनी बहन को बहुत प्यार करता था। भाई दूज के दिन वो बिना तिलक लगाए कुछ खाता पीता नहीं था।

    एक बार उसकी पत्नी ने उससे पूछा कि अगर उसकी बहन की शादी कहीं दूर हो गई तो वो क्या करेगा। इसपर वो बोला कि वो अपनी बहन की शादी कहीं दूर नहीं होने देगा।

    अब उसने अपने माता पिता से भी कहकर बहन की शादी पास ही के गांव में करवा दी। परन्तु जिस लड़के से उसकी बहन की शादी हुई वो अपने ससुराल के लोगो को पसंद नहीं करता। यहां तक कि अपनी पत्नी के मायके से किसी को आने भी ना देता।

    इस दुविधा में बहन का रो कर बुरा हाल हो गया था। उसने अपने पति का मायके संदेश भेज दिया। कुछ ही दिनों में भाई दूज का त्योहार भी अा गया।  छोटे भाई से रहा नहीं गया और वो नहा धोकर बहन के घर तिलक लगाने जा पहुंचा। वहां उसके बहनोई ने उसे सात तालों में बंद कर दिया और फिर काम पर चला गया।

    लेकिन छोटे भाई को वेश बदलना आता था। उसने कुत्ते के बच्चे का रूप धारण कर लिया और नाली के रास्ते अपनी बहन के पास जा पहुंचा। वहां उसकी बहन बहुत रो रही थी और हल्दी पीसते पीसते मन ही मन सोचती कि वो अपने भाई को टीका लगा पाएगी या नहीं। इतने में कुत्ते का बच्चा वहां पहुंचता है लेकिन दुखी बहन गुस्से में उसे मार बैठती है।

    फिर कुत्ते का पिल्ला अपने मुंह से एक सोने का सिक्का फेंकता है और वहां से चला जाता है। जब बहनोई काम से लौटकर ताला खोलता है तो उसे भाई के सिर पर पांच तिलक नजर आता है।

    अब वह अपनी पत्नी को पूछने लगता है कि उसने अपने भाई को पांच तिलक क्यों लगाया। वह बताती है कि उसने तो अपने भाई को देखा तक नहीं था। फिर वह कुत्ते वाली बात बताती है।

    ऐसा सुन बहनोई को अपनी गलती का एहसास होता है। और वह दोनों भाई बहन से माफी मांगता है। इसी प्रकार भाई बहन के रिश्ते की कहानी प्राचीन काल से ही चली अा रही है और आज भी भारत में इसे रक्षाबंधन और भाई दूज के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।

    अभी आपने भाई दूज की कहानी नम्बर २ पढ़ी। तो अब आपको ये पता चल गया होगा कि भाई दूज क्यों मनाते हैं। आइए देखते हैं कि भाई दूज कब और कैसे मनाया जाता है।

    भाई दूज की कहानी – भाई दूज कब मनाया जाता है

    भाई दूज की कहानी – भाई दूज कब मनाया जाता है ? भाई और बहन के रिश्ते के लिए मनाया जाने वाला यह पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। देश के अलग अलग राज्यो में लोग भाई दूज के त्योहार को बहुत ही श्रृद्धा भाव से मनाते हैं।

    भाई दूज प्रत्येक वर्ष दीपावली के दो दिन बाद तीसरे दिन मनाया जाता है। बहन यमुना ने कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ही अपने भाई यमराज को तिलक लगा उसका स्वागत किया था और भोजन कराया था।

    इसलिए भाई दूज का त्योहार हर वर्ष इसी दिन मनाया जाता है। आपको बता दें कि भाई दूज का यह त्योहार यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

    भाई दूज की कहानी – भाई दूज कैसे मनाते हैं – भाई दूज पूजा विधि

    भाई दूज की कहानी – भाई दूज कैसे मनाते हैं ? आपमें से ऐसे कई लोग होंगे जिन्हें यह नहीं पता होगा कि भाई दूज कैसे मनाते हैं। इसलिए भाई दूज की व्रत विधि हम आपको बताने जा रहे हैं। भाई दूज का दिन भाई और बहन के लिए काफी शुभ माना जाता है। इस दिन बहन स्नान कर साफ़ कपड़े धारण करती है।

    बहन ऐपन बनाकर उससे अपने हाथों के छापे बनाती है और पूजा करती है। कई जगह ऐपन से सात बहने और एक भाई की आकृति भी बनाई जाती है। साथ में सांप या बिच्छू की आकृति भी बनाई जाती है।

    बहन आदर सत्कार और स्नेह से अपने भाई को तिलक लगाती है और साथ ही भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। हर राज्य में भाई दूज अलग अलग तरीके से मनाया जाता है।

    पूर्वी भारत में बहन शंख बजने के बाद अपने भाई को तिलक लगाती है और उपहार भेंट करती है। वहीं उत्तर भारत में बहन अपने भाई को अक्षत तिलक लगाकर नारियल भेंट करती है। पूजा, आरती के बाद ही बहन कुछ खाती है। आपको बता दें कि भाई दूज त्योहार के दिन यम देवता की पूजा की जाती है।

    भाई दूज की आरती के वक्त बहन की थाली में फूल, सिंदूर, नारियल, सुपारी, पान, चावल के दाने, कलावा, दूब, चांदी का सिक्का, और केला रखा जाता है। इन चीजों को भाई दूज के दिन मुख्यता दी जाती है।

    जैसा कि हम जानते हैं कि भारत में किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में दान का काफी महत्व है। इसलिए भाई दूज के दिन किसी गरीब या फिर ब्राह्मण को भोजन कराना शुभ माना जाता है। इस पावन पर्व के दिन आप किसी जानवर या पक्षी को भी भोजन करवा सकते हैं।

    इस दिन बहनें व्रत रखती है और उन्हें दोपहर के बाद ही भोजन करना चाहिए। साथ ही हर भाई अपनी बहन को सामर्थ्य अनुसार कुछ उपहार जरूर देता है।

    बंगाल राज्य में भाई दूज को ‘भाई फोटा’ के नाम से जाना जाता है। वहां इस त्योहार को दुर्गा पूजा के पहले और दूसरे दिन ही मनाया जाता है। साथ ही महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटका राज्यो में इसे भाई बिज कहते है।

    वहीं नेपाल में भाई दूज को भाई टीका के नाम से जाना जाता है। चाहे राज्य या प्रदेश कोई भी हो पर हर जगह भाई बहन के इस त्योहार को धूम धाम से मनाया जाता है।

    अब आप जान गए होंगे कि भाई दूज क्यों मनाते हैं, भाई दूज की कहानी क्या है, भाई दूज कब मनाते हैं और भाई दूज कैसे मनाते हैं। भाई बहन के इस त्योहार की परम्परा को आप भी बनाए रखें और एक दूसरे की खुशियों की कामना करें।

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