Day 2: माता ब्रह्मचारिणी की कहानी, आरती, मंत्र – Devoted Brahmacharini story in Hindi

Day 2: माता ब्रह्मचारिणी की कहानी, आरती, मंत्र – Devoted Brahmacharini story in Hindi

मां ब्रह्मचारिणी – नवरात्रि के दूसरे दिन जिन्हें पूजा जाता है। माता ब्रह्मचारिणी की कहानी, मंत्र, आरती, कथा और पूजा विधि जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

नवरात्रि का व्रत पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से ही शुरू हो जाता है और दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी के नाम में ब्रह्मा का अर्थ है ‘तपस्या’ और चारिणी का अर्थ है ‘आचरण करने वाले’। माँ ब्रह्मचारिणी की कहानी हम आपको आगे विस्तार से बताएँगे।

इसलिए ऐसा माना जाता है कि यदि कोई सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करे तो त्याग, तप, वैराग्य, सदाचार, और संयम में वृद्धि होती है। कठिन से कठिन समय में मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करने से मन विचलित नहीं होता है। माता ब्रह्मचारिणी अपने भक्त जनों के सभी दोषों को दूर करती हैं और इनकी कृपा से सिद्धि तथा विजय की प्राप्ति होती है।

आज के इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि माता ब्रह्मचारिणी की कथा क्या है, ब्रह्मचारिणी माता की आरती, मंत्र, पूजा विधि एवं मां ब्रह्मचारिणी की कहानी क्या है। ये जानकारियां प्राप्त करने के लिए इस लेख को अंत तक पढ़े।

आपको बता दें कि इस लेख में दी गई जानकारी की विश्वसनीयता उतनी ही है जितना हमारे धर्म ग्रंथों एवं पंचांगों में बताया गया है। विभिन्न माध्यमों जैसे कि पंचांग, मान्यताओं और धर्म ग्रंथो से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक लाई गई है। इस लेख के जरिए हम आप तक मां ब्रह्मचारिणी की कहानी से संबंधित जानकारी पहुंचा रहे हैं।

Table of Contents

    द्वितीया –  मां ब्रह्मचारिणी

    ब्रह्मचारिणी माता के स्वरूप की बात करे तो अत्यंत भव्य और ज्योतिर्मय स्वरुप वाली माता अपर्णा, उमा और तपश्चारिणी के नाम से भी जानी जाती है। माता ब्रह्मचारिणी की हाथों में कमंडल और अक्ष माला है।

    Brahmacharini story in hindi
    माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप चित्रण

    सच्चे मन से माता की पूजा करने पर व्यक्ति को एकाग्रता, लगन, ज्ञान और संयम रखने की शक्ति मिलती है।

    ब्रह्मचारिणी मां की पूजा से सभी अधूरे कार्य बन जाएंगे और जीवन की परेशानी दूर हो जाएगी। ऐसा माना जाता है कि माता ब्रह्मचारिणी को सफेद और सुगंधित जैसे कि कमल का पुष्प अर्पित करना चाहिए। साथ ही मां ब्रह्मचारिणी की आरती घी एवं कपूर मिलाकर करनी चाहिए। इन्हें शक्कर का भोग लगाएं। इससे आपके परिजनों की आयु में वृद्धि होगी।

    नवरात्रि के दूसरे दिन ब्राह्मण को भी शक्कर दान दे सकते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता ब्रह्मचारिणी ने काफी तपस्या की थी। इसी वजह से इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी भी कहा जाता है। तो देखते हैं माता ब्रह्मचारिणी की कहानी या कथा क्या है।

    मां ब्रह्मचारिणी की कहानी / कथा – Maa Brahmacharini Story in Hindi

    जैसा कि आप सबको पता है नवरात्रि में नौ दिनों तक मां शक्ति के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में नव दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को पूजा जाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन जिन्हें पूजा जाता है वो मां ब्रह्मचारिणी हैं।

    अब हम आपको बताएंगे कि मां ब्रह्मचारिणी की कहानी या कथा क्या है। इनके नाम का अर्थ असीम, अनंत में विद्यमान और गतिमान है मतलब एक ऐसी ऊर्जा जो न तो जड़ है और ना ही निष्क्रिय पर अनंत में विचरण करने वाली।

    कई वर्षों के कठिन उपवास और तपस्या से शिव मिलने के बाद इनका नाम ब्रह्मचारिणी कहलाया है। तो देखते हैं आखिर मां ब्रह्मचारिणी की कहानी क्या है।

    माँ ब्रह्मचारिणी की कहानी Maa Brahmacharini Story in Hindi

    ऐसा माना जाता है कि माता ब्रह्मचारिणी का जन्म हिमालय राज पर्वत के घर हुआ था। जब हिमालय राज ने अपनी पुत्री के भविष्य के बारे में पूछा तो नारद जी ने कहा कि कन्या के विवाह में अवरोध आएगी और इसके निवारण के लिए व्रत एवं तप करने को कहा।

    हिमालय पुत्री ठीक उसी तरह तप में लीन हो गई और उन्होंने कई वर्षों तक देव और ब्रह्मदेव की आराधना की। इनकी तपस्या का ज़िक्र तुलसीदास ने कुछ इस प्रकार किया है।

    कछुन भोजन वारि बतासा।

     कीन्ह कछुक दिन कठिन उपवासा।।

    इस कठिन तपस्या के बाद ही हिमालय पुत्री का नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार जब ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव के लिए तपस्या की तो इन्होंने उस दौरान 1000 वर्षों तक सिर्फ फल-फूल खाए थे और बहुत दिनों तक उपवास पर ही जीवित रही। इतने कठिन उपवास और तपस्या से उनका शरीर क्षीण हो गया था।

    माता ब्रह्मचारिणी की तपस्या देख कर सभी देवता और ऋषि-मुनि अचंभित हो गए थे और कहा कि ऐसी तपस्या कोई नहीं कर सकता। देवताओं ने कहा कि आपकी मनोकामना पूरी होगी और आपको भगवान शिव जरूर मिलेंगे।

    मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की व्याख्या इस श्लोक में की गई है।

    ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नम: ॥

    दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।

    देवि प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

    मां ब्रह्मचारिणी मंत्र

    मां ब्रह्मचारिणी मंत्र

    या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

    नवरात्रि के दूसरे दिन जिन्हें पूजा जाता है, मां ब्रह्मचारिणी सरल स्वभाव की है। इनके बाएं हाथ में कमंडल और दाएं हाथ में जप की माला है। इनकी पूजा से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है।

    ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों का चंद्रमा कमज़ोर होता है, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए। साथ ही साथ तपस्वियों एवं विद्यार्थियों को इनकी साधना से काफी लाभ होगा।

    यदि मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा की जाए तो भक्तों को अनंत फल मिलेगा और तप, त्याग, सदाचार एवं संयम की प्राप्ति होगी। आपको बता दें कि माता ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग काफी प्रिय है। इसलिए इनकी पूजा के समय सफेद मिठाई या सफेद खाद्य पदार्थ का भोग लगाएं।

    ऐसा कहा जाता है कि सफेद फूल और सफेद मिठाई के भोग से माता जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। यहां हम आपके साथ माता ब्रह्मचारिणी मंत्र शेयर कर रहे हैं।

    माता ब्रह्मचारिणी मंत्र और श्लोक

    दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु|

    देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

    वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।

    जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥

    गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।

    धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥

    परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।

    पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

    या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।

    देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

    ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी।

    सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते।।

    मां ब्रह्मचारिणी स्त्रोत पाठ

    तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।

    ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

    शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।

    शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥

    मां ब्रह्मचारिणी कवच

    त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी।

    अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥

    पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥

    षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।

    अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।

    ब्रह्मचारिणी माता की आरती

    अब आपको पता चल गया होगा कि मां ब्रह्मचारिणी की कहानी क्या है और ब्रह्मचारिणी मंत्र क्या है। अब हम देखते हैं कि माता ब्रह्मचारिणी की आरती क्या है।

    माता ब्रह्मचारिणी की आरती

    जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

    जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।

    ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

    ज्ञान सभी को सिखलाती हो।

    ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

    जिसको जपे सकल संसारा।

    जय गायत्री वेद की माता।

    जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।

    कमी कोई रहने न पाए।

    कोई भी दुख सहने न पाए।

    उसकी विरति रहे ठिकाने।

    जो ​तेरी महिमा को जाने।

    रुद्राक्ष की माला ले कर।

    जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।

    आलस छोड़ करे गुणगाना।

    मां तुम उसको सुख पहुंचाना।

    ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

    पूर्ण करो सब मेरे काम।

    भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

    रखना लाज मेरी महतारी।

    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें

    हर साल नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की परंपरा है। मां दुर्गा की यह स्वरूप तप का आचरण करने वाली देवी हैं। अपने हाथों में कमंडल और जप की माला लिए माता ब्रह्मचारिणी संसार में तप, ज्ञान और संयम लाती हैं।

    शास्त्रों के अनुसार इनका जन्म हिमालय के घर पुत्री के रूप में हुआ था। माता भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए काफी कठिन तपस्या करती हैं और इसलिए इन्हे ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।

    इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें। आपको बता दें कि इनकी पूजा से घर में उज्ज्वलता और ऐश्वर्य का आगमन होता है। तो आइए देखते हैं कि तप की देवी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें।

    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें – नवरात्रि के पहले दिन से ही हमें चारों तरफ धार्मिक माहौल देखने को मिलता है। सभी लोग प्रथम पूजा से ही स्वच्छ वस्त्र में दिखाई देते हैं।

    Maa Brahmacharini Pooja Hindi, माँ ब्रह्मचारिणी पूजा विधि

    • नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह उठकर नित्यकर्मों से निवृत हो जाएं और फिर स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र का धारण करें।
    • पूजा की जगह पर एक साफ आसन बिछाकर बैठें।
    • इसके बाद माता ब्रह्मचारिणी को फूल, अक्षत, रोली और चंदन चढ़ाए।
    • क्योंकि मां ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग काफी प्रिय है इसलिए कोशिश करें कि सफेद फूल से इनकी पूजा हो।
    • साथ में माता को दूध, दही, घी, मधु और शर्करा से स्नान करवाएं।
    • कई लोगों का मानना है कि मां को पिस्ते का भोग भी लगाना चाहिए।
    • इसके बाद माता को लौंग, सुपारी और पान चढ़ाएं।
    • फिर मां ब्रह्मचारिणी मंत्र का जाप करें जो आपको इसी लेख में मिल जाएंगे।
    • पूजा के समय गाय के गोबर के उपले जलाने चाहिए और उसमें आप घी, लौंग जोड़ा, पान, सुपारी, कपूर, हवन सामग्री, गूगल, इत्यादि अर्पित कर सकते हैं।
    • इसके साथ “ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रह्मचारिण्‍यै नम:” मंत्र का भी जाप करें।

    मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं – Offerings for Maa Brahmacharini

    हालांकि हर एक भक्त अपने सामर्थ्य अनुसार भगवान को भोग लगा सकते हैं। सबसे मुख्य बात यह है कि आराधना के वक़्त आप सच्चे मन से उनका ध्यान करें। लेकिन अन्य देवी-देवताओं की तरह मां ब्रह्मचारिणी को भी कुछ चीजों के भोग लगाने से जल्दी लाभ मिलता है।

    ऐसा माना जाता है कि माता ब्रह्मचारिणी को पिस्ते की मिठाई काफी पसंद है इसलिए बहुत से लोग उन्हें यही भोग लगाते हैं। दूसरी ओर यदि फूलों की बात करे तो मां ब्रह्मचारिणी को कमल और गुड़हल के पुष्प बेहद पसंद है।

    इसलिए यदि संभव हो तो नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में गुड़हल या कमल के फूलों की माला इनके चरणों में अर्पित करें। बहुत लोगों का यह भी मानना है कि ब्रह्मचारिणी माता को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग काफी प्रिय है।

    इसलिए मां ब्रह्मचारिणी को इन चीजों का भोग लगाएं। यदि आप इस तरह से पूजा करते हैं तो मां प्रसन्न हो जाएंगी।

    नवरात्रि के दूसरे दिन की मुख्य बातें

    • मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित नवरात्रि का दूसरा दिन अपने आप में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इनकी आराधना से तपस्या का वरदान मिलता है। यह पूजा अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती है। जब मां ब्रह्मचारिणी ने कठोर तपस्या की थी तो भगवान शिव उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए थे। माता की यह तपस्या देख समस्त देवतागण अचंभित हो गए थे।
    • आपको बता दें कि नवरात्रि का पर्व साल में कुल चार बार मनाया जाता है जिसमें दो प्रमुख माने जाते हैं – चैत्र और शारदीय नवरात्रि। पहले दिन मां शैलपुत्री के पूजन से ही नवरात्रि का पर्व शुरू हो जाता है और दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी के लिए होता है। नवरात्रि के दूसरे दिन अपनी कुंडलिनी शक्तियों को जागृत करने के लिए पूजा की जाती है।
    • ऐसा मानना है कि माता ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और इनकी पूजा अत्यंत फलदायक है। जो भी ब्रह्मचारिणी माता की पूजा सच्चे मन से करता है उसे त्याग, संयम, वैराग्य, और सदाचार में उन्नति प्राप्त होती है।

    मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व

    पूरे भारत में मनाया जाने वाला नवरात्रि का त्योहार काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। उत्तर भारत में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा नौ दिनों तक की जाती है। भक्त जन पूरे नौ दिनों तक उपवास का संकल्प लेते हैं और पूरी श्रद्धाभाव से मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं।

    नवरात्रि का पर्व पहले दिन के कलश स्थापन से शुरू होता है और कई लोग अखंड ज्योति भी जलाते हैं। हर एक दिन देवी के अलग अलग रूप की पूजा होती है और अष्टमी या नवमी को कुवांरी कन्याओं को भोजन कराया जाता है।

    अर्पणा कहलाने वाली मां ब्रह्मचारिणी ने अपनी तपस्या के दौरान पत्तों के भोजन को भी त्याग दिया था। ब्रह्मचारिणी का रूप हमें तपश्चर्या और लक्ष्य के प्रति समर्पण करना सिखाता है। माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप जो हाथो में कमंडल और माला लिए है, साधकों में बल भरता है।

    आपको बता दें कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूप –

    • प्रथम शैलपुत्री,
    • द्वितीय ब्रह्मचारिणी,
    • तृतीया चंद्रघंटा,
    • चतुर्थी कूष्मांडा,
    • पंचमी स्कंदमाता,
    • षष्ठी कात्यायनी,
    • सप्तमी कालरात्रि,
    • अष्टमी महागौरी और
    • नवमी सिद्धिदात्री की पूजा होती है।

    हम आपको इन सब रूपों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे। उम्मीद है आपको ये लेख पसंद आया हो। माता ब्रह्मचारिणी की कहानी, मंत्र, आरती, कथा और पूजन विधि लोगों को भी बताएं।

    नवरात्रि का त्योहार हमें नारियों को सम्मान देना भी सिखाता है। इसलिए देवी के पूजन के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी सम्मान देना चाहिए।

    यहाँ हमारी माँ ब्रह्मचारिणी की कहानी (Brahmacharini story in Hindi) समाप्त होती है। उम्मीद है आपको हमारी ये पोस्ट पसंद आयी होगी।

    हमसे जुड़े रहने का धन्यवाद।

    FAQ – अन्य पूछे गए सवाल

    Who is goddess Brahmacharini? माँ ब्रह्मचारिणी कौन हैं?

    ब्रह्मचारिणी एक समर्पित छात्रा है जो अपने गुरु और साथी शिष्यों के साथ एक आश्रम में रहती है। यह उनके दूसरे पहलू का नाम है, और इसका उपयोग देवी दुर्गा (पार्वती) को सम्बोधित करने के लिए भी किया जाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन देवी की पूजा की जाती है।

    Who is the father of Brahmacharini? माँ ब्रह्मचारिणी के पिता कौन हैं?

    ब्रह्मचारिणी नाम दो शब्दों से बना है – “ब्रह्मा” का अर्थ है तप या तपस्या और “चारिणी” का अर्थ है एक उत्साही महिला अनुयायी। यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह करने के बाद, दुर्गा ने पहाड़ों के राजा, हिमवान की बेटी के रूप में जन्म लिया।

    Why do we worship Maa Brahmacharini? हम माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यूँ करते हैं?

    शास्त्र कहते हैं कि देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह की अधिपति हैं। वह सभी भाग्य की दाता है और वह अपने भक्तों के सभी मानसिक कष्टों को दूर करके उनके गहरे दुखों को दूर करती है। मंगल दोष और कुंडली में मंगल की प्रतिकूल स्थिति से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए इनकी पूजा की जाती है।

    What is today’s Colour for Navratri? नवरात्रि में आज का रंग कौन सा होता है?

    इस दिन, लोग शाही नीले रंग को पहनेंगे, एक ऐसा रंग जो दिव्य ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है

    Which Colour is significant for Goddess Brahmacharini? माँ ब्रह्मचारिणी को किस रंग से चरितार्थ किया जाता है?

    देवी ब्रह्मचारिणी नारंगी रंग के कपड़े पहने हुए हैं जो उनके बलिदान का प्रतीक है। हालांकि, भक्तों के लिए दिन का रंग शाही नीला है। इसलिए अक्सर देखा जाता है कि पूजा के दौरान लोग नीला रंग पहनते हैं। द्वितीया तिथि को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा फूल, अक्षत, रोली और चंदन चढ़ाकर की जाती है।

    Who is the goddess of the second day of Navratri? नवरात्रि के दूसरे दिन किसकी पूजा की जाती है?

    नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

    What is the second form of Durga? माँ दुर्गा का दूसरा रूप कौन है?

    Brahmacharini नवरात्रि का दूसरा दिन देवी दुर्गा के दूसरे रूप को ‘ब्रह्मचारिणी’ के नाम से जाना जाता है। उसका नाम ‘ब्रह्मा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है ‘तप’ या तपस्या। वह उमा या पार्वती का एक रूप है, माता शक्ति का एक रूप है।

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