Dhanteras Pooja – 5 Important Considerations धनतेरस की पूजा कैसे करें

Dhanteras Pooja – 5 Important Considerations धनतेरस की पूजा कैसे करें

Dhanteras Pooja Kaise Karen? धनतेरस की पूजा कैसे करें | धनतेरस की पूजा विधि।

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    भारत में दीपावली का त्योहार पांच दिनों तक बड़ी श्रद्धा के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। इस पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस की पूजा से होती है। पहले दिन धनतेरस आता है।

    When do we celebrate Dhanteras? धनतेरस कब मनाते हैं?

    कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस की पूजा की जाती है। धनतेरस को त्रयोदशी के दिन मनाते हैं इसलिए इसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है। धनतेरस को हम धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जानते हैं। धनतेरस 2021 में 2 नवंबर के दिन मनाया जाएगा। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के ही दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक धन्वंतरि देव समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और इसलिए धनतेरस को धन्वंतरि जयंती कहा जाता है।

    धनतेरस के दिन से ही देश भर में दीपावली की शुरुआत हो जाती है। दीवाली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, इसलिए गरीब से लेकर अमीर तक, सारे लोग अपनी क्षमता के अनुसार इस खुशियों के त्योहार को मनाते हैं।

    आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि धनतेरस की पूजा कैसे करते हैं, धनतेरस की पूजा विधि क्या है, धनतेरस की पूजा सामग्री और धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए। धनतेरस की पूजा से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त करने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

    Dhanteras Pooja – धनतेरस की पूजा विधि

    दीपावली का त्योहार हमारे जीवन में खुशियां लेकर आता है और यह पांच दिनों का पर्व धनतेरस से ही शुरू होता है। धन और आरोग्य से जुड़ा यह धनतेरस का त्योहार काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। धनतेरस की पूजा के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है।

    साथ ही आरोग्य के लिए धन्वंतरि की पूजा होती है। धनतेरस की पूजा के दिन मूल्यवान धातु, नए बर्तन, एवम् आभूषण की खरीदारी की जाती है। कुबेर और धन्वंतरि के अलावा धनतेरस के दिन यमदेव को भी दीपदान किया जाता है।

    ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन यमदेव की पूजा करने से घर में अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक में कुछ पैसा या कौड़ी रख कर जलाना चाहिए।

    Dhanteras Pooja – धनतेरस की पूजा पर बरतें ये सावधानियां

    धनतेरस से ही दीवाली की शुरुआत हो जाती है। इस दिन आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जो हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं। दीवाली से पहले ही हर घर में साफ सफाई शुरू हो जाती है।

    धनतेरस की पूजा के दिन घर में कबाड़ नहीं रखना चाहिए। यदि इस दिन घर में कबाड़ या खराब सामान पड़ा है तो इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन नहीं होता है। इसलिए धनतेरस की पूजा से पहले ही कबाड़ को घर से निकाल देना चाहिए।

    साथ ही घर के मुख्य द्वार के सामने कोई भी बेकार वस्तु नहीं रखनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्य द्वार को नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है और ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार के जरिए ही घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है। इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा साफ सुथरा होना चाहिए।

    धनतेरस की कहानी - Dhanteras Wishes
    Dhanteras Wishes

    अक्सर कई लोग धनतेरस की पूजा के दिन सिर्फ कुबेर की ही पूजा करते हैं। यह गलती आपको नहीं करनी चाहिए। धनतेरस के दिन आपको कुबेर के साथ मां लक्ष्मी और धन्वंतरि की पूजा करनी चाहिए।

    ये तो सबको पता होगा कि धनतेरस की पूजा के दिन धातु खरीदा जाता है। लेकिन कई लोग इस दिन शीशे के बर्तन खरीद लेते हैं जो कि नहीं करना चाहिए। धनतेरस के दिन सोने या चांदी के नए बर्तन खरीदना काफी शुभ माना जाता है। साथ ही साथ इस दिन किसी को भी उधार देने से बचें।

    ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन अपने घर की लक्ष्मी का प्रवाह बाहर होने से आपको देनदारी या कर्ज का भार उठाना पड़ सकता है। इसलिए धनतेरस के दिन किसी को भी उधार देने से बचें।

    अन्य गलती जो आपको धनतेरस के दिन नहीं करना चाहिए वो यह है कि नकली मूर्तियों की पूजा ना करें। धनतेरस के दिन आपको सोने, चांदी या फिर मिट्टी की बनी मूर्तियों की पूजा करनी चाहिए। साथ ही साथ नकली प्रतीकों को भी घर में ना लगाएं। सिर्फ स्वस्तिक या ॐ जैसे प्रतीकों को कुमकुम, हल्दी से बनाएं।

    Dhanteras Pooja धनतेरस की कहानी – धनतेरस की पौराणिक कथा

    धनतेरस के दिन धन्वंतरि के अलावा मां लक्ष्मी और कुबेर की भी पूजा की जाती है। धनतेरस को मनाने के पीछे धन्वंतरि के जन्म की कहानी है। इसके साथ धनतेरस की एक और पौराणिक कथा काफी प्रचलित है जो हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

    यह पौराणिक कथा कुछ इस प्रकार है – एक बार भगवान श्री विष्णु मृत्युलोक में विचरण करने जा रहे तो लक्ष्मी जी ने कहा कि वे भी उनके साथ जाना चाहती हैं। जिस पर विष्णु जी ने कहा कि यदि जैसा मैं कहूं तुम वैसा ही मानो तो चलो। लक्ष्मी जी उनकी बात मान गई और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर आईं। एक जगह पर ठहर विष्णु जी ने कहा कि जब तक मैं ना आऊं तुम यहीं रुको। उन्होंने कहा कि वे दक्षिण दिशा की ओर जा रहे हैं और लक्ष्मी जी को उधर जाने से मना किया।

    जैसे ही विष्णु जी गए, लक्ष्मी जी के मन में कौतूहल जगने लगा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या छुपा है जो वो जा नहीं सकती। इसलिए लक्ष्मी जी दक्षिण दिशा की ओर चल पड़ी।

    कुछ दूर चलकर उन्हें एक सरसों का खेत दिखा जहां बहुत सारे फूल थे। उन खूबसूरत फूलों को देखकर वो मंत्रमुग्ध हो गई और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार कर आगे बढ़ी। आगे वहां एक गन्ने का खेत मिला तो वे वहां गन्ने तोड़कर रस चूसने लगी।

    तभी वहां पर विष्णु जी आ गए और लक्ष्मी जी को देख काफी क्रोधित हुए। उन्होंने कहा कि मना करने पर तुम इधर आ गई और किसान की चोरी का अपराध भी कर बैठी। विष्णु जी ने उन्हें कहा कि अब तुम्हें इस अपराध के जुर्म में किसान की 12 वर्ष तक सेवा करनी होगी।

    यह कहकर विष्णु जी वहां से क्षीरसागर की ओर चल पड़े और लक्ष्मी जी गरीब किसान के घर रहने लगीं। एक दिन लक्ष्मी जी ने किसान की पत्नी को कहा कि तुम स्नान कर के मेरी बनाई गई देवी की पूजा करो और उसके बाद ही रसोई बनाना।

    किसान की पत्नी ने वैसा ही किया और दूसरे दिन ही किसान का घर अन्न, धन, रत्न, आदि से भर गया। इस तरह लक्ष्मी जी के आशीर्वाद से उस गरीब किसान का घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। अब किसान के 12 वर्ष काफी आनंद से गुज़रे और फिर 12 वर्ष बाद लक्ष्मी जी जाने के लिए तैयार हुईं।

    जब विष्णु जी उन्हें लेने आए तो किसान ने उन्हें भेजने से मना कर दिया। तब विष्णु जी ने कहा कि यह तो चंचला हैं, ये कहीं नहीं ठहरती। इन्हें जाने से बड़े बड़े नहीं रोक पाए। और विष्णु जी ने किसान को बताया कि कैसे 12 वर्ष के श्राप की वजह से वो वहां रुकी थी।

    तब किसान ने हठपूर्वक कहा कि वो लक्ष्मी जी को नहीं जाने देगा। इसपर लक्ष्मी जी ने किसान को कहा कि यदि मुझे रोकना चाहते हो तो जैसा मैं कहूं वैसा करो। उन्होंने कहा कि कल तेरस है और तुम कल घर को साफ, लीप-पोतकर रखना। रात में घी का दीपक जलाना, और सायंकाल को मेरी पूजा करना। उन्होंने कहा कि एक तांबे के कलश में रुपए भरना और मैं उसी कलश में निवास करूंगी।

    पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी लेकिन उस एक दिन की पूजा से मैं साल भर तुम्हारे घर में रहूंगी। किसान को ये बातें बताकर लक्ष्मी जी दीपकों के प्रकाश की तरह दसों दिशाओं में फ़ैल गई। तेरस के दिन किसान ने लक्ष्मी जी के कथानुसार ही पूजन किया और उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया। और इस तरह हर साल तेरस के दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाने लगी।

    Dhanteras Pooja – धनतेरस की पूजा कैसे करें

    धनतेरस के ही दिन भगवान धन्वंतरि सागर मंथन के बाद अपने हाथों में स्वर्ण कलश लेकर उत्पन्न हुए थे। उन्होंने अपने कलश में भरे अमृत से देवताओं को अमर बना दिया था। धनतेरस के दिन धन्वंतरि की उत्पत्ति हुई और ठीक दो दिन बाद लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी।

    इसी वजह से धनतेरस के दिन से ही दीपावली का त्योहार शुरू हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि धन्वंतरि देवताओं के वैद्य है और यदि सच्चे मन से इनकी पूजा की जाए तो आरोग्य की प्राप्ति होती है।

    भगवान धन्वंतरि श्री विष्णु के अवतार है और संसार में चिकित्सा विज्ञान के प्रसार के लिए ही विष्णु ने धन्वंतरि का अवतार लिया था। यदि आप सोच रहे हैं कि धनतेरस की पूजा कैसे करें तो नीचे दिए गए भाग को अच्छे से पढ़े।

    धनतेरस के दिन धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। साथ ही यमदेव को भी दीपदान किया जाता है।

    यमदेव की पूजा करने से घर में अकाल मृत्यु नहीं होती। एक दीपक में कुछ पैसा या कौड़ी डालकर मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर जलाना चाहिए। हर साल कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की उदयव्यापिनी त्रयोदशी को धनतेरस की पूजा की जाती है। इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में यमराज को दीपदान किया जाता है।

    Dhanteras Pooja – धनतेरस की पूजा विधि

    धनतेरस की पूजा विधि – हर किसी को धनतेरस की पूजा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि धनतेरस की पूजा विधि क्या है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तेरह दीप जलाकर तिजोरी में कुबेर की पूजा करनी चाहिए।

    और कुबेर का ध्यान कर उन्हें फूल, धूप, नैवेद्य, आदि से पूजन करें। साथ ही धनतेरस के दिन स्थिर लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व होता है। ऐसा भी माना जाता है कि यदि दीवाली के पांच दिनों में श्रीयंत्र खरीदे तो अचूक धनसंपत्ती की प्राप्ति होती है।

    धनतेरस के दिन धन्वंतरि की विधिवत 16 क्रियाओं से पूजन संपन्न करना चाहिए। जिसमें अर्घ्य, आसन, पाद्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, आभूषण, पुष्प, धूप, नैवेद्य, दीप, आरती, दक्षिणायुक्त तांबूल, और परिक्रमा आदि आते हैं।

    धनतेरस पर चांदी या पीतल के बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन बर्तन खरीदने से समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसलिए इसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं। यमदेव की पूजा दिन में नहीं बल्कि रात में की जाती है। इसे जमदीया कहते हैं।

    यम को दीपदान करने से पहले जल, फूल, रोली, चावल, गुड़ और नैवेद्य से पूजा करनी चाहिए। घर में पहले से दीप जलाकर यम का दिया नहीं निकालना चाहिए।

    Dhanteras Pooja – धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए

    कुछ चीज़े ऐसी है जिनको धनतेरस पर खरीदना शुभ माना जाता है। अक्सर हम गलती कर एल्युमिनियम, स्टील, लोहा, प्लास्टिक, कांच या चीनी की बनी वस्तुएं खरीद लेते हैं। आपको बता दें कि इन सामग्रियों को खरीदने से बचना चाहिए।

    धनतेरस की पूजा के दिन आप सोना खरीद सकते हैं। सोना सबसे शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है इसलिए अपने सामर्थ्य आप सोना खरीद सकते हैं। अगला धातु है चांदी। धनतेरस पर चांदी की वस्तु खरीदना भी काफी शुभ होता है। चांदी को शांत, शीतल और पवित्र धातु माना जाता है।

    इसलिए यदि आप सोना नहीं खरीद सकते तो चांदी जरूर खरीदें। यदि आप सोना या चांदी दोनों ही लेने में सक्षम नहीं है तो निराश होने की कोई बात नहीं है। धनतेरस की पूजा के दिन आप पीतल से बनी वस्तु भी खरीद सकते हैं।

    यदि पीतल संभव नहीं तो आप तांबा से बनी वस्तु खरीद सकते हैं। तांबा पूजा के लिए और सेहत के लिए भी अच्छा होता है। साथ ही धनतेरस पर आप कांसा से बनी वस्तु भी ले सकते हैं।

     इतना ही नहीं यदि आप किसी धातु की वस्तु लेने में असमर्थ है तो आप मिट्टी से बनी वस्तु खरीद सकते हैं। मिट्टी से बनी वस्तु भी काफी शुभ मानी जाती है। बाज़ार में भी आपको मिट्टी से बनी कई वस्तुएं नजर आएंगी।

    धातु के साथ साथ धनतेरस पर अन्य कई वस्तुएं खरीदी जाती है। इस दिन झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस पर बहुत लोग अपना नया खाता भी खुलवाते हैं। धनतेरस की पूजा के दिन गोमती चक्र भी ले सकते हैं।

    यह एक समुद्री घोंघा होता है जो मुख्य रूप से गोमती नदी में मिलता है। गोमती चक्र धन, दौलत, सुख, सेहत का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन मुख्य रूप से लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति जरूर खरीदें।

    आपने देखा होगा कि दीपावली के दौरान गाड़ियों की बिक्री काफी बढ़ जाती है। धनतेरस के दिन गाड़ी खरीदना अच्छा माना जाता है। हालांकि धनतेरस के दिन गाड़ी का भुगतान ना करें।

    तो ये था धनतेरस के दिन क्या खरीदना चाहिए। उम्मीद है आपको धनतेरस की पूजा के बारे में पर्याप्त जानकारी मिल गई होगी।

    धनतेरस की पूजा विधि, धनतेरस की पूजा कैसे करते हैं, धनतेरस की पूजा की कहानी और पौराणिक कथा से लेकर धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए, सारी जानकारी यहां दी गई है।

    यदि धनतेरस की पूजा के विषय में कोई समस्या है तो आप कमेंट कर हमसे साझा कर सकते हैं।

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